Thursday, 2 August 2012

A letter to Sh. Anna Hazare from Bharat Kee Parmanu Saheli

दिनांक:-02.08.2012
महाशय अन्नाजी को भारत की परमाणु सहेली का नमस्कार!
आप से रूबरू होने की बहुत ही दिली तमन्ना है.
मैंने भी एक सुंदर एवं विकसित भारत का सपना देखा है. मैंने उसको महसूस किया अपने अहससो में. इस सपने का हकीकत में आना ही इसकी नियति है - प्रकृति ने हमेशा से ही विकास का स्वागत किया है.
इस सपने के हकीकत का आधार है - विद्युत् शक्ति में भारत का पूर्ण आत्मनिर्भर हो जाना.
यदि हमारे पास कल, आज की उपलब्ध बिजली की तुलना में, १० गुना अधिक बिजली की आपूर्ति है तो उसी अनुपात में नए - नए कलकारखानें, परिष्कृत रूप में यातायात की व्यवस्थाएं, कृषि के उन्नत तरीकें, उन्नत स्वस्थ्य एवं शिक्षा सेवांयें, उन्नत सुरक्षा एवं प्रसाधन सेवाएं, इत्त्यादी हों सकेंगी.
भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए आप के द्वारा चलाई मुहिम एवं मेरे द्वारा विद्युत् के आवश्यक उत्पादन के लिए चलाई गयी मुहिम से वास्तव में ही हम एक पूर्ण विकसित भारत का सपना ही नहीं वरन उसको साकार होते हुए भी देख सकतें हैं.
१. जब पूर्ण गहराई तक मैं यहाँ जान गयी हूँ कि भारत के विकास का मुख्य आधार विद्युत ऊर्जा ही है और भारत में इसकी बहुत कमी है तो हर हालात में हमें बिजली का उत्पादन बढ़ाना ही है. सभी स्रोतों को उनकी मह्त्वताएं एवं सीमाओं के साथ लेके चलना पड़ेगा. ऐसे में नाभिकीय स्रोत की बिजली के उत्पादन में महत्वता, सततता एवं योगदान की आवश्यकता को स्वीकारना ही पड़ेगा. और क्यों नहीं स्वीकारें जबकि यह हर लिहाज़ से श्रेष्ठ एवं सर्वोत्तम है. विकसित देशों से यदि नाभिकीय विद्युत् के योगदान को हटा दिया जाए तो ये देश गरीब देशों की श्रेणी में आ जाएंगे. परमाणु विद्युत् केन्द्रों के चलते हुए १४५०० रिएक्टर-वर्ष पूरे हो चुकें हैं पर अभी तक एक भी व्यक्ति सम्बंधित जन-सामान्य में से हताहत नहीं हुआ जबकि संभंधित देशों को इन केन्द्रों ने उनके चौंतरफ़ा विकास के लिए लगातार बिजली की आपूर्ति की है और करते रहेंगे.
२. भारत एक प्रजातांत्रिक देश है. जन-सामान्य से लेकर प्रबुद्ध जनों में परमाणु ऊर्जा से विद्द्य्त के उत्पादन के संधर्भ में बहुत सारी अज्ञान्तायें एवं भ्रांतियां है. इसी ही बात का नाजायज फायदा एंटी-न्यूक्लियारिस्ट्स एवं लोकल क्षेत्रीय नेताँ लोग उठातें हैं.
एक ताजा-ताजा उदाहरण है कुडनकुलम परमाणु विद्युत् परियोजना. अगले दिन प्रारम्भ होने वाला यह विद्दयुत केंद्र तमिलनाडु की मुख्यमंत्री साहिबा की वजह से चालू होने से पहले ही मृत प्राय: अवस्था में आया हुआ है. जो योजना सही है तो फिर जो गलत हो रहा है उसको गलत कहकर अच्छाई को तो सामने लाना होगा ही.
३. केंद्र सरकार यानी माननीय डा. मनमोहन सिंह की सबसे ख़ास एवं आवश्यक योजना जोकि सभी संभव स्रोंतों से विद्दुत उत्पादन की है यदि इसके सफल क्रियान्वयन में हम सभी भारतीय एकजुट हों जाए तो क्या यहाँ वास्तव में ही हमारा सच्चाई का साथ देना नहीं होगा? होगा, और एसा ही हमें करना भी होगा.
४. एक बहुत ही गहराई के साथ हमें हकीकत को अपनाना ही होगा. ताकि बाद में हमें पचताना ना पड़े.
५. मेरा तो यही मानना रहेगा कि वर्तमान सरकार में मनमोहन सिंहं जी को हम पूर्ण रूप से नैतिक समर्थन देकर इनके इरादों को शक्ति प्रदान करें...
भोली और जिज्ञासु भारतीय जनता के विकास के लिए हमें अपने इस बुद्धिमान, दूरदर्शी, कर्मठ, धैर्यवान, चतुर, ईमानदार एवं देश के विकास के लिए समर्पित राजा को समझना ही होगा. जो प्रधानमंत्री विद्दयुत उर्जा के लिए आवश्यक ईंधन के लिए अपनी कुर्सी तक को भी दांव पर लगा दें और अपनी चतुर नीति के द्वारा बहुमत भी ला कर अपने उद्देश्य में सफल हो जाये वही तो उसकी राजा होने को सिद्ध करता है वरना झूंठ और कपट से हार कर मिट्टी में मिल जाये तो फिर वहा कैसा रजा.
६. आपकी मुहिम का मै स्वागत करती हूँ लेकिन उसमें बसी अति-उत्कंठा एवं अधैर्य को मैं एक ऐसे कंप्यूटर की तरह मानती हूँ जो सिर्फ यांत्रिक रूप से कार्य करता है.
७. मैं तो इतना समझ गई हूँ कि आप के साथ-साथ वो भी एवं भारतीय जनता भी ऐसा ही चाहती है, आवश्यता है तो एक - दूसरे मैं विस्वास जता कर निरंतर अपने पथ पर चलते रहने की.
आपसे मिलने की आशा में,
जय हिन्द!
भारत की परमाणु सहेली ( डा. नील)

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